लिवर को डिटॉक्स करने के लिए 6 आयुर्वेदिक टॅबलेट्स

पुनर्नवा मन्दूर टैबलेट्स

Punarnava Mandur एक पारंपरिक आयुर्वेदिक दवा है जिसे ज़्यादातर उन लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जिन्हें खून की कमी (एनीमिया), लिवर की कमजोरी, तिल्ली का बढ़ना या यूरिन कम आने जैसी समस्याएं होती हैं। उत्तर भारत में ये फार्मूला पुराने समय से चला आ रहा है, और आज भी इसे डॉक्टर और वैद्य बड़ी गंभीरता से सुझाते हैं। कई जानी मानी आयुर्वेदिक कंपनियां इस दवा को बनाती हैं, जैसे बैद्यनाथ, डाबर और प्लेनेट आयुर्वेदा।

इस दवा का सबसे बड़ा फायदा ये है कि ये शरीर के अंदर छुपी सूजन, टॉक्सिन और गंदे खून को साफ करने का काम करती है. यानी ये शरीर के अंदर का “सफाईकर्मी” बन जाती है। जो लोग लंबे समय से थकान, पीलापन या पानी रुकने जैसी दिक्कत से परेशान हैं, उनके लिए ये टैबलेट काफी फायदेमंद हो सकती है।

इस दवा का मुख्य घटक है मंडूर भस्म

इस टैबलेट में सबसे ज़रूरी घटक होता है मंडूर भस्म — अर्थात आग में कई बार शुद्ध करके बनाया गया आयरन। एक टैबलेट में करीब 320 मिलीग्राम मंडूर होता है, जो शरीर में खून बनाने और कमजोरी दूर करने में मदद करता है।

पुनर्नवा मन्दूर टैबलेट्स के दूसरे घटक द्रव्य और उनके फायदे

पुनर्नवा (Punarnava): किडनी की सूजन और यूरिन रुकने की समस्या में फायदेमंद माना जाता है ।

  • सौंठ (Shunthi): पेट की सफाई और सूजन कम करने वाली जड़ी बूटी
  • काली मिर्च और पिप्पली (Marich & Pippali): आयरन के पाचन और संचार में मददगार
  • त्रिफला (Haritaki, Bibhitaki, Amalaki): शरीर से गंदगी निकालने वाला कॉम्बिनेशन
  • कटुकी (Katuki): लिवर की सफाई और कार्यक्षमता सुधारने में उपयोगी

ये सारे घटक मिलकर Punarnava Mandur को एक असरदार आयुर्वेदिक दवा बनाते हैं। यह सिर्फ खून बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि शरीर के अंदर जमा गंदगी को साफ करने, सूजन कम करने और लिवर-किडनी जैसे अंगों को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है।

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पुनर्नवा के बारे में कुछ खास – शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकालता है

पुनर्नवा एक ऐसी जड़ी-बूटी है जिसे आयुर्वेद में कई सालों से लीवर और किडनी की बीमारियों में इस्तेमाल किया जाता रहा है। अब नए ज़माने की वैज्ञानिक रिपोर्टें भी यही साबित कर रही हैं कि यह वाकई फ़ायदे की चीज़ है।

साल २०२३ में एक रिसर्च रिपोर्ट जर्नल ऑफ़ एथ्नोफार्माकोलॉजी में छपी थी। उसमें यह बताया गया कि जब पुनर्नवा का अर्क उन जानवरों को दिया गया जिनकी किडनी ठीक से काम नहीं कर रही थी, तो उनकी सेहत में सुधार देखा गया। उनके खून में मौजूद ज़हरीले तत्व भी कम हो गए।

इस जड़ी में कुछ असरदार प्राकृतिक तत्व होते हैं — जैसे फ्लेवनॉइड्स और सैपोनिन्स — जो शरीर के अंदर सफ़ाई करने में मदद करते हैं। ये सूजन घटाने और पेशाब के रास्ते शरीर से गंदगी बाहर निकालने में भी असर दिखाते हैं।

इससे ये बात साफ़ होती है कि पुनर्नवा सिर्फ़ परंपराओं की बात नहीं है, बल्कि आज की साइंस भी इसे काम की जड़ी मानती है — ख़ासकर उन लोगों के लिए जिनका लीवर या किडनी सही ढंग से काम नहीं कर रहा।

(सिंह और साथियों द्वारा, २०२३)

फायदे – Punarnava Mandur से शरीर को क्या लाभ मिलते हैं

  • Punarnava Mandur शरीर में आयरन की कमी को दूर करने में मदद करता है और इस कमी से जुड़ी थकान, चक्कर आना या चेहरे का पीला पड़ना जैसी समस्याओं में राहत देता है। इसमें शामिल मंडूर भस्म एक ऐसा रूप है जिसे शरीर आसानी से स्वीकार कर लेता है और यह खून में हीमोग्लोबिन का स्तर सुधारने में सहायक माना जाता है।
  • यह फार्मूला न सिर्फ खून बढ़ाता है बल्कि खून में जमा हानिकारक तत्वों जैसे यूरिया और क्रिएटिनिन को भी घटाने में उपयोगी साबित होता है, जो आमतौर पर किडनी या लीवर की कार्यक्षमता में कमी आने पर बढ़ जाते हैं।
  • इसमें मौजूद पुनर्नवा, कटुकी और त्रिफला जैसी औषधियां लिवर को साफ़ करने, पाचन को सुचारु रखने और टॉक्सिन को शरीर से बाहर निकालने का काम करती हैं, जिससे शरीर का आंतरिक संतुलन सुधरता है और नई ऊर्जा का संचार होता है।
  • स्प्लीन यानी तिल्ली के बढ़ने की समस्या (splenomegaly) में यह दवा सूजन को कम करने के साथ-साथ रक्त की सफाई में भी मदद करती है, जिससे यह अंग दोबारा अपनी सामान्य स्थिति में काम करने लगता है।
  • यह टैबलेट पाचन तंत्र को मज़बूती देती है और खाने से मिलने वाले पोषण को बेहतर तरीके से अवशोषित करने में मदद करती है, जिससे शरीर को ज़रूरी ताक़त और रोग-प्रतिरोधक क्षमता मिलती है।
  • इसके साथ ही Punarnava Mandur कफ और पित्त जैसे दो प्रमुख दोषों को संतुलित करता है, जिससे शरीर की क्रियाएं एक सही लय में चलती हैं और रोगों से लड़ने की शक्ति बेहतर बनती है।

सेवन विधि – इसका इस्तेमाल कैसे और कितनी मात्रा में करें

आमतौर पर Punarnava Mandur की सलाह दी जाती है एक टैबलेट दिन में दो बार, खाना खाने के बाद पानी के साथ लेना। हालांकि, कुछ विशेष मामलों में जैसे लिवर से जुड़ी समस्याओं या पाचन संबंधी गड़बड़ियों के लिए, कुछ वैद्य इसे छाछ के साथ लेने की सलाह भी देते हैं ताकि इसकी असरकारिता और बढ़ जाए।

हर व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति और समस्या अलग होती है, इसलिए इसकी मात्रा और सेवन अवधि को लेकर किसी अनुभवी आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लेना ज़रूरी है, ताकि दवा का पूरा लाभ सुरक्षित रूप से मिल सके।

प्रो वैलनेस मंत्रा का कैप्टन लिव

कैप्टन लिव एक ऐसी टैबलेट है जिसे लिवर की सेहत बनाए रखने के लिए तैयार किया गया है। यह पूरी तरह जड़ी-बूटियों से बनी होती है और इसमें कोई केमिकल या खनिज नहीं डाला जाता। इसे बनाने में वही चीज़ें इस्तेमाल की गई हैं जो पुराने समय से आयुर्वेद में लिवर की सफाई और ताक़त के लिए दी जाती रही हैं। हर डिब्बे में ६० टैबलेट्स होती हैं, जिन्हें रोज़ खुराक के तौर पर लिया जा सकता है।

प्रोवेलनेस मंत्रा एक ऐसा ब्रांड है जो अपने हर्बल डाइटीरी सप्लीमेंट बेचने के साथ-साथ एक इंटीग्रेटेड क्लिनिक की तरह भी काम करता है। प्रोवेलनेस मंत्रा का फंडामेंटल कॉन्सेप्ट यही है, कि जैसे कोई मां अपने बच्चे को दवा देती है, और उसके मन में होता है कि बच्चे को खुद दवा नहीं लेनी चाहिए, बल्कि मैं ही उसको दवा दूं। यही वजह है, कि प्रोवेलनेस मंत्रा ने डॉक्टरों की एक पूरी टीम बनाई है, और जब कोई व्यक्ति उनका प्रोडक्ट खरीदता है, तो उसको एक डॉक्टर एक महीने के लिए असाइन कर दिया जाता है, जो उस व्यक्ति को खरीदे गए प्रोडक्ट को कैसे खाना है, सावधानियां, और पर्याप्त कंसल्टेशन देने का काम करता है।

खैर कैप्टन लिव लिवर टैबलेट कि बात करते हैं। क्या ये हिमाल्या कंपनी के लिव 52 की तरह ही प्रभावी है।

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इसमें कौन-कौन सी जड़ी-बूटियां हैं और वे क्या काम करती हैं?

पुनर्नवा

ये जड़ी बूटी लिवर और किड्नी दोनों के लिए काफी प्रभावी पाई गई है। चाहे बात प्राचीन किताबों की हो, चाहे आयुर्वेदिक चिकित्सकों का अनुभव हो, और यहाँ तक कि आधुनिक शोध भी कहते हैं, कि पुनर्नवा जिगर और गुर्दों के लिए फायदेमंद होता है। ये शरीर से टॉक्सिन बाहर निकलने में मदद करता है। यही वजह है इसको पीलिया, पुरानी गुर्दों कि बीमारी, लिवर कि सूजन आदि में इस्तेमाल किया जाता रहा है। और यही वजह है कि इसको कैप्टन लिव में भी डाला गया है।

कटुकी

कटुकी एक पारंपरिक आयुर्वेदिक जड़ी है जो लिवर की कार्यप्रणाली को सुचारु बनाए रखने में मदद करती है। इसका असर सीधे पित्त रस के निर्माण पर पड़ता है, जो शरीर में भोजन को ठीक से पचाने और वसा को तोड़ने के लिए ज़रूरी होता है। जब पित्त सही मात्रा में बनता है, तो पाचन आसान हो जाता है और लिवर पर ज़रूरत से ज़्यादा दबाव नहीं पड़ता। कटुकी न केवल पाचन को संतुलित रखती है, बल्कि शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने की प्रक्रिया को भी बेहतर बनाती है। इसी वजह से इसे एक ऐसी जड़ी माना जाता है जो लिवर को भीतर से साफ़ और सक्रिय बनाए रखने में सहायक होती है।


भूमि आमला

भूमि आमला एक उपयोगी जड़ी है जिसका प्रयोग अक्सर फैटी लिवर की स्थिति में किया जाता है। जब लिवर में चर्बी जमने लगती है, तो उसकी कोशिकाएं सुस्त हो जाती हैं और काम करने की क्षमता घट जाती है। भूमि आमला इन कमजोर कोशिकाओं की मरम्मत में मदद करती है और नई कोशिकाओं के निर्माण को बढ़ावा देती है। इसके साथ ही, यह लिवर की सफाई प्रक्रिया को भी गति देती है, जिससे विषैले तत्व बाहर निकलते रहते हैं। इस तरह यह जड़ी लिवर को धीरे-धीरे उसकी सामान्य स्थिति में लौटने में सहायता करती है — बिना किसी तीव्र दवा के असर के।


कालमेघ

कालमेघ को आयुर्वेद में एक ऐसी जड़ी के रूप में जाना जाता है जो लिवर को बाहरी नुकसान से बचाने के लिए काम करती है। जब शरीर में संक्रमण होता है या दवाओं का ज़्यादा असर पड़ता है, तो लिवर पर सूजन आ सकती है। कालमेघ इस सूजन को कम करता है और साथ ही लिवर की कोशिकाओं को मजबूत बनाता है ताकि वे बेहतर ढंग से काम कर सकें। इसका असर धीरे-धीरे होता है, लेकिन यह लंबे समय तक लिवर को सुरक्षा देने में सहायक रहता है। इसे एक तरह से लिवर के “संरक्षक” के रूप में देखा जा सकता है।


शरपुंखा

शरपुंखा वह जड़ी है जो शरीर की अंदरूनी सफाई व्यवस्था को मजबूत बनाती है — खासकर उस प्रक्रिया को जिसमें लिवर खून को साफ़ करता है। जब यह सफाई धीमी पड़ती है तो शरीर में गंदगी इकट्ठा होने लगती है और लिवर पर अधिक काम का बोझ आ जाता है। शरपुंखा इस प्रक्रिया को संतुलन में लाता है, जिससे लिवर को कम मेहनत करनी पड़ती है और उसकी ताकत बनी रहती है। यह खासकर उन लोगों के लिए उपयोगी होती है जिन्हें लगातार भूख न लगना, थकावट या पीलापन जैसी समस्याएं रहती हैं।


त्रिफला

त्रिफला — जो हरड़, बहेड़ा और आंवला से मिलकर बनता है — पाचन को ठीक रखने और शरीर की गंदगी बाहर निकालने में मदद करता है। जब पाचन सही होता है, तो लिवर को ज़्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती क्योंकि शरीर पहले से ही खुद को साफ़ रख रहा होता है। त्रिफला सीधा लिवर पर काम नहीं करता, लेकिन उसकी मदद ज़रूर करता है — और यही इसकी खासियत है। इसका असर धीरे-धीरे होता है लेकिन अगर इसे नियमित रूप से लिया जाए, तो यह लिवर की सेहत को स्थिर बनाए रखने में एक भरोसेमंद सहायक साबित होता है।

इसे कैसे लेना चाहिए?

आमतौर पर इसे दिन में एक या दो बार, खाना खाने के बाद पानी के साथ लिया जाता है। लेकिन अगर पहले से कोई बीमारी है या कोई और दवा चल रही है, तो इसे लेने से पहले डॉक्टर या वैद्य से सलाह ज़रूर लें।

कुछ और ज़रूरी बातें

हर बोतल में ६० टैबलेट्स होती हैं। यह दवा पूरी तरह जड़ी-बूटियों से बनाई जाती है, और इसमें किसी भी तरह का केमिकल या खनिज नहीं डाला जाता। सभी घटक ज्यादा से ज्यादा साइड इफेक्ट फ्री रखने कि कोशिश की गई है।

कैप्टन लिव टैबलेट लेने का सही तरीका और खुराक

सुबह शाम एक एक टैबलेट खाना खाने के बाद लेनी चाहिए। अधिक जानकारी के लिए चिकित्सक से बात कर सकते हैं।

ज़ंडू लिवाइटल टैबलेट

ज़ंडू लिवाइटल एक ऐसी आयुर्वेदिक टैबलेट है जो उन लोगों के लिए बनाई गई है जिन्हें लिवर को ठीक रखने में दिक्कत आ रही हो या जिनकी पाचन क्रिया धीमी चल रही हो। इस टैबलेट का असर धीरे-धीरे होता है, यानी कोई तेज़ बदलाव तुरंत नहीं दिखता। लेकिन अगर इसे रोज़ ठीक समय पर और लगातार लिया जाए, तो लगभग दो महीने के अंदर लिवर की हालत में कुछ सुधार साफ़ महसूस किया जा सकता है।

इसका काम शरीर के भीतर सफाई की उस प्रक्रिया को बेहतर बनाना है, जिससे खून में जमा वे चीज़ें — जैसे खराब वसा, दवाओं के बचे हुए असर या खाने की गंदगी — धीरे-धीरे कम होने लगती हैं। जब ये सब कम होता है, तो लिवर वापस अपनी सही कन्डिशन में आने में मदद मिलती है।

पैकिंग और जानकारी

यह टैबलेट दो तरह के पैक में मिलती है – ६० गोली और ९० गोली। इसमें कोई भी ऐसा तत्व नहीं डाला गया है जो शरीर को नुकसान पहुँचा सके, जैसे किसी तरह का केमिकल या लंबे समय तक शरीर में बना रहने वाला पदार्थ । इसे पूरी तरह जड़ी-बूटियों से बनाया गया है।

इसमें क्या-क्या डाला गया है और वो क्या करते हैं

  • कालमेघ- शरीर के अंदर की सूजन को कम करता है और लिवर पर बाहर से आने वाली खराब चीज़ों का असर घटाता है।
  • गिलो – शरीर की ताक़त बढ़ाने और लिवर को धीरे-धीरे सही रूप से काम करने में मदद करता है।
  • भृंगराज – खून को साफ़ करने और लिवर को धीरे से राहत देने में सहायक।
  • कटुकी – लिवर से पित्त बनने की प्रक्रिया को संतुलित करता है जिससे पाचन बेहतर होता है।
  • रक्ता पुनर्नवा – पेशाब के ज़रिए शरीर की गंदगी को बाहर निकालने में मदद करती है, जिससे लिवर का बोझ कम होता है।
  • विदंग और रोहितक – लिवर की सफाई में मदद करते हैं और भूख को थोड़ा सुधार सकते हैं।
  • त्रिवृत और दरुहरिद्रा – आंतों की सफाई और पाचन सुधारने में उपयोगी।
  • पाठा और कुटज – लिवर और पेट से जुड़ी हल्की समस्याओं को धीरे-धीरे सुधारते हैं।

ज़ंडू लिवाइटल टैबलेट के फ़ायदों पर एक नजर

  • शरीर में जमा हुई ज़हरीली गंदगी को धीरे-धीरे बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे भीतर हल्कापन महसूस होता है और थकावट, सुस्ती जैसी शिकायतें कम हो सकती हैं।
  • लिवर की ताक़त को धीमे लेकिन प्रभावशाली तरीके से बढ़ाता है, ताकि लंबे समय में लिवर की प्राकृतिक क्षमता वापस या सके और वो फिर से अपना काम ठीक ढंग से कर सके।
  • जब लिवर और शरीर के अंग ठीक होने लगते हैं, तो पेट और आँतों में भी रसों का संतुलन बेहतर होता है, जिससे खाना पचने की प्रक्रिया आसान हो जाती है।
  • हालाँकि मुख्य असर लिवर पर ही होता है, लेकिन शरीर के विषैले तत्वों की सफाई होने से किडनी का काम भी थोड़ा आसान होता है और इस वजह से गुर्दों का स्वास्थ्य में भी हल्का सुधार हो सकता है।
  • भूख बढ़ने लगती है क्योंकि जब शरीर अंदर से स्वस्थ होने लगता है तो भूख लगना स्वाभाविक है, साथ ही खाना हज़म करने की ताकत भी पहले से बेहतर हो जाती है।
  • फैटी लिवर जैसी समस्या में धीरे-धीरे राहत देता है क्योंकि ये लिवर के अंदर जमी अतिरिक्त चर्बी को हटाने में सहायता करता है, जिससे लिवर फिर से सामान्य और स्वस्थ स्थिति में लौटने लगता है।

सेवन कैसे करें

दिन में दो बार – एक बार सुबह और एक बार रात को, खाना खाने के बाद पानी के साथ लें। अगर पहले से कोई बीमारी हो या कोई और दवा चल रही हो, तो इसे लेने से पहले किसी अच्छे वैद्य या डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।

सावधानियाँ

  • किसी गंभीर बीमारी में बिना पूछे इसका सेवन न करें। गर्भावस्था, बच्चे को दूध पिलाते समय, मासिक धर्म के समय औरतें इसको बिना डॉक्टर कि सलाह के न इस्तेमाल करें।
  • बताई गई मात्रा से ज्यादा मात्रा में न लें।

कीमत

९० टैबलेट्स वाला पैक लगभग ₹१९९ से ₹२४९ के बीच आता है।

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डाबर हेपानो टेबलेट्स


Dabur Heano एक ऐसा आयुर्वेदिक टैबलेट है जिसे डाबर ने लिवर की सेहत को ध्यान में रखते हुए तैयार किया है। डाबर भारत की सबसे पुरानी और भरोसेमंद आयुर्वेदिक कंपनियों में से एक है। यह टैबलेट लिवर को बाहरी असर से सुरक्षित रखने, उसकी थकान को कम करने और धीरे-धीरे उसकी ताक़त वापस लाने में मदद करता है।

डाबर हेपानो टेबलेट्स के मुख्य गटक द्रव्य

  • भुम्यामलकी (जिसे भुई आँवला भी कहा जाता है)
  • गुडूची (गिलोय के नाम से जानी जाती है)
  • नीम (जो शरीर की सफाई में मदद करता है)
  • कालमेघ (पाचन और लिवर दोनों के लिए फायदेमंद)
  • हरीतकी (हरड़ जो पेट की सफाई में काम आती है)
  • आंवला (जो शरीर की ताक़त बढ़ाता है)
  • बिभीतकी (बहेड़ा जो त्रिफला का हिस्सा है)
  • कटुकी (जो लिवर को ठंडक और राहत देती है)

डाबर हेपानो टेबलेट्स के क्या फायदे हो सकते हैं

  • यह टैबलेट लिवर की कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाने वाले ज़हरीले असर से बचाने में मदद करता है।
  • लिवर अगर थका हुआ या कमज़ोर है, तो यह धीरे-धीरे उसे फिर से सामान्य स्थिति में लाने का काम करता है।
  • लिवर के अंदर मौजूद एंज़ाइम का स्तर बेहतर होने लगता है जिससे उसका काम सुचारु रूप से चलता है।
  • इससे पित्त का बनना और बहना आसान होता है, जिससे खाना अच्छे से पचता है।
  • जब पाचन ठीक होता है, तो शरीर को खाना ठीक से हज़म करने और पोषक तत्व लेने में आसानी होती है।
  • यह शरीर की अंदरूनी सफाई में मदद करता है, जिससे शरीर हल्का और साफ महसूस होता है।
  • जिन लोगों को फैटी लिवर की शिकायत है, उनके लिए यह धीरे-धीरे राहत देने वाला उपाय साबित हो सकता है।

खुराक

इस टैबलेट को दिन में दो बार खाना खाने के बाद लेना चाहिए। एक बार सुबह और एक बार रात को। मात्रा एक या दो टैबलेट हो सकती है, लेकिन सही डोज़ जानने के लिए किसी आयुर्वेदिक डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी है।

सावधानियाँ

  • अगर कोई महिला गर्भवती है या दूध पिला रही है, तो उसे यह टैबलेट लेने से पहले डॉक्टर से ज़रूर पूछ लेना चाहिए।
  • यह 12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए नहीं है।

कीमत

60 टैबलेट वाला एक पैक आम तौर पर ₹150 से ₹200 के बीच मिल जाता है। यह कीमत लिवर के लिए एक भरोसेमंद आयुर्वेदिक उपाय के लिहाज से सही मानी जा सकती है।

Jiva Kutki Capsule

Introduction:
Jiva Kutki Capsule एक ऐसा आयुर्वेदिक कैप्सूल है जो खासतौर पर लिवर को साफ़ रखने और उसकी ताकत लौटाने के लिए बनाया गया है। इसमें इस्तेमाल की गई कुटकी जड़ी-बूटी हिमालय की ऊँचाई पर उगती है, जहाँ ये पौधा ज़्यादा असरदार माना जाता है। ये एक ही जड़ी-बूटी वाला फार्मूला है, जिसे जिवा आयुर्वेद ने अपने तीस साल के अनुभव से भरोसे के साथ तैयार किया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसमें किसी भी तरह की मिलावट या केमिकल नहीं डाले गए हैं, जिससे इसे रोज़मर्रा में बेझिझक लिया जा सकता है।

Specifications:

  • रूप: ये शाकाहारी कैप्सूल हैं जिन्हें पानी के साथ आराम से निगला जा सकता है।
  • संख्या: एक डिब्बे में 60 कैप्सूल होते हैं जो ज़्यादातर लोगों को एक महीने तक चलते हैं।
  • एक्सपायरी: मार्च 2026 तक इसका इस्तेमाल किया जा सकता है, बस इसे नमी और धूप से बचाकर रखें।
  • प्राकृतिकता: इसमें कोई केमिकल, रंग या प्रिज़र्वेटिव नहीं है, यानी ये पूरी तरह नेचुरल है।
  • स्रोत: इसमें जो कुटकी इस्तेमाल हुई है, वह हिमालय के शुद्ध और शांत इलाकों से लाई गई है।

Ingredients:
इस कैप्सूल में सिर्फ एक जड़ी-बूटी मिलाई गई है — कुटकी की जड़। आयुर्वेद में इसे लिवर को ठीक रखने वाली बहुत असरदार जड़ी-बूटी माना गया है। हर कैप्सूल में बराबर मात्रा में इसका अर्क डाला गया है, ताकि इसका असर हर बार एक जैसा और भरोसेमंद हो।

Benefits:

  • यह लिवर में बनने वाले पित्त को बेहतर करता है, जिससे खाना अच्छे से पचता है और भारीपन महसूस नहीं होता।
  • तली-भुनी चीज़ें या ज़्यादा दवा खाने से जो ज़हर शरीर में जमा हो जाता है, उनसे लिवर को बचाने में यह मदद करता है।
  • अगर लिवर की काम करने की ताकत कम हो गई हो तो यह उसे धीरे-धीरे बेहतर करने में सहारा देता है।
  • यह शरीर को अंदर से साफ़ करने का काम करता है, जिससे लिवर को ज़्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती।
  • बिना ज़रूरत की भूख बार-बार लगती हो, या मोटापा बढ़ रहा हो, तो उसमें थोड़ा कंट्रोल ला सकता है।
  • ये हाजमे या पाचन शक्ति को बढ़ाता है, जिससे खाना जल्दी हजम होने में मदद मिलती है।
  • कब्ज होने पर ये पेट साफ़ करने और पेट हल्का महसूस कराने में मदद करता है।
  • खून में शुगर ऊपर-नीचे हो रहा हो तो उसे कंट्रोल में रखने में थोड़ा सहारा मिल सकता है।
  • इसके अंदर जो ताक़तवर प्राकृतिक तत्व होते हैं, वो दिल की सेहत को भी थोड़ी मजबूती दे सकते हैं।

Dosage:
इस कैप्सूल को रोज़ सुबह और रात, दोनों टाइम खाना खाने के बाद लेना चाहिए। अगर किसी को पहले से कोई बीमारी हो या कोई और दवा चल रही हो, तो डॉक्टर से पूछकर ही इसकी सही मात्रा तय करें।

Precautions:

  • कोई भी दवा लेने से पहले अगर आप गर्भवती हैं या बच्चे को दूध पिला रही हैं, तो डॉक्टर से ज़रूर सलाह लें।
  • इसे बच्चों की पहुँच से दूर रखें और ठंडी, सूखी जगह पर रखें।
  • धूप में रखने से इसके असर पर फर्क पड़ सकता है, इसलिए इससे बचाकर रखें।
  • याद रखें, ये सिर्फ एक हेल्थ सपोर्ट कैप्सूल है, इसका मतलब ये नहीं कि आप खानपान को नजरअंदाज़ करें।

Price Range:
इस कैप्सूल की एक बोतल ₹400 से ₹500 के बीच मिलती है। कुटकी जैसी हिमालयी जड़ी-बूटी की शुद्धता और असर को देखें तो ये कीमत वाजिब लगती है, खासतौर पर उनके लिए जो लिवर की सेहत को लेकर सचेत हैं।

एमिलिक्योर डीएस कैप्सूल

एमिलिक्योर डीएस कैप्सूल, Aimil Pharmaceuticals द्वारा बनाया गया एक ऐसा आयुर्वेदिक फॉर्मूला है, जो लिवर या जिगर या यकृत कि हेल्थ को मैन्टैन रखने या किसी वजह से हुई लिवर कि परेशानियों जैसे पीलिया, सूजन या फिर गंभीर परेशानियों जैसे लिवर सिरोसिस में फायदा पहुंचाने के लिए बनाया गया है।

इस दवा के घटक द्रव्य

इस छोटे से कैप्सूल में 29 आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का मिश्रण है, जो अकेले नहीं, बल्कि एक ग्रुप की तरह मिलकर लिवर को सपोर्ट करती हैं। प्रत्येक कैप्सूल में लगभग 500–600 मिलीग्राम औषधीय तत्व मौजूद हैं, जो इसे एक पावरफुल लिवर सप्लीमेंट बनाता है।

मुख्य जड़ी-बूटियाँ

  • कालमेघ– पाचन को दुरुस्त करता है और भूख बढ़ाने में मदद करता है। अगर खाना खाने का मन नहीं करता या पेट भारी लगता है, तो यह आपका साथी है।
  • कुटकी– लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) के परिणामों को संतुलित करने में असरदार।
  • भूमिआंवला– लिवर पर टॉक्सिन्स के प्रभाव को कम करता है और इम्युनिटी को बूस्ट करता है।

इसके अलावा, गिलोय, शरपुंखा, और मुलेठी जैसी जड़ी-बूटियाँ लिवर की कमजोर कोशिकाओं को रिपेयर करने में मदद करती हैं। खास बात यह है कि अगर किसी ने शराब, हेपेटाइटिस, या लिवर को प्रभावित करने वाली दवाओं का सेवन किया है, तो यह कैप्सूल उनके लिए एक भरोसेमंद बैकअप बन सकता है।

कौन ले सकता है यह कैप्सूल?

अगर आपको बार-बार अपच, भूख न लगना, फैटी लिवर, या वायरल हेपेटाइटिस जैसी पुरानी समस्या है, तो डॉक्टर की सलाह से यह कैप्सूल आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। साथ ही, अगर आप ऐसी दवाएँ ले रहे हैं जो लिवर को नुकसान पहुँचा सकती हैं, तो यह कैप्सूल एक प्रोटेक्टिव बफर का काम करता है।

रोजाना की खुराक

आमतौर पर 1–2 कैप्सूल, दिन में 2–3 बार लेने की सलाह दी जाती है। डॉक्टर की सलाह लेना न भूलें अगर आप गर्भवती हैं, स्तनपान करा रही हैं, या बच्चों के लिए इसका उपयोग करना चाहती हैं।

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